बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मजदूरों के लिए की गई बसों की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विशेष बस से लोगों को भेजना एक गलत कदम है। उन्होंने एनडीटीवी से खास बातचीत में कहा कि इससे बीमारी और फैलेगी जिसकी रोकथाम करना सबके लिए मुश्किल हो जाएगा।
उन्होंने कहा कि लोगों को कहीं से भी बुलाने में समस्या और बढ़ जाएगी। बिहार सरकार चाहती है कि जो लोग जहां हैं, वहीं उनके खाने और रहने की व्यवस्था कर दी जाए। बसों से लोगों को बुलाने से लॉकडाउन फेल से हो जाएगा। बसों से लोगों भेजना गलत कदम है।
मालूम हो कि दिल्ली-एनसीआर से हजारो की संख्या में लोग अपने घरों को जाने के लिए पैदल ही निकले पड़े हैं। इसमें ज्यादातर दिहाड़ी मजदूर हैं। जिनका काम लॉकडाउन होने से ठप पड़ गया है। इसे देखते हुए ही उत्तर प्रदेश सरकार ने 200 बसों की व्यवस्था की है।
कई दिनों से मुश्किलों का सामना कर रहे लोगों को राहत तो जरूर मिली है, लेकिन भीड़ में संक्रमण का खतरा अधिक है। जो कि आगे भयावह रूप ले सकता है। यूपी सरकार की बसें नोएडा और गाजियाबाद से हर दो घंटों में रवाना होंगी। हालांकि दिल्ली सरकार ने इन लोगों के लिए जरूर सामान की व्यवस्था करने का आश्वासन दिया है, लेकिन लोग किसी भी हालत में अपने घर लौटना चाहते हैं।
हेल्पलाइन नंबर पर फोन ना लगे तो मुख्यमंत्री ऑफिस में फोन करें
नीतीश कुमार ने बिहार के बाहर फंसे लोगों से अपील की है। उन्होंने कहा है कि अगर बिहार को बचाना है और बिहार से प्रेम है तो जो जहां हैं वहीं रहें। सरकार आपके लिए हर जरूरी सामान की व्यवस्था कर रही है।
नीतीश कुमार ने कहा कि किसी को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी। लॉकडाउन में फंसे लोग हेल्पलाइन पर फोन के जरिए अपनी लोकेशन बताएं। उनकी मदद की जाएगी। इसके अलावा हेल्पलाइन नंबर पर फोन ना लगे तो मुख्यमंत्री ऑफिस में फोन करें। हर तरह की सहायाता की जाएगी। बिहार में अभी तक नौ लोग कोविड-19 से संक्रमित पाए गए हैं, वहीं एक मरीज की मौत हुई है।